- Post by Admin on 13-09-2024 05:26:40pm
भिण्ड. (मुकेश मिश्रा )हिंदी के कवि व साहित्यकार आशुतोष शर्मा नन्दू ने हिंदी दिवस के अवसर पर बताया कि मां भारती के माथे का सुशोभित भाल है हिंदी त्याग ,समर्पण, बलिदान और राष्ट्रप्रेम से उत्प्रोत भाषा है यदि हम हिंदी को पढ़ेंगे जानेंगे समझेंगे तो स्वत: ही हम हिंदी के हो जाएंगे हम मां भारती के हो जाएंगे।देशभक्ति के अंकुर अपने आप मन के भावों में उतर आएंगे।भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान और गर्व का प्रतीक भी है।हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका केवल साहित्यिक या सांस्कृतिक संदर्भ में ही नहीं है, बल्कि यह हमारी सामाजिक और राष्ट्रीय एकता को भी सुदृढ़ करती है। भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में, हिंदी एक ऐसा साझा माध्यम है जो विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के बीच समझ और संवाद का पुल तैयार करता है।हिंदी दिवस हमें इस बात की याद दिलाता है कि हमें अपनी भाषा की पहचान बनाए रखनी चाहिए और इसे न केवल अपने घरों में, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में प्रोत्साहित करना चाहिए। हमें अपने बच्चों को हिंदी की महत्ता समझानी चाहिए और उन्हें इसके प्रति प्यार और सम्मान सिखाना चाहिए।हिंदी दिवस पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी मातृभाषा का सही तरीके से उपयोग करें और इसे संजोएं।शिक्षा, संचार और मीडिया के क्षेत्र में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका को समझना और अपनाना आवश्यक है।हिंदी दिवस हमें अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व और सम्मान की भावना को जागरूक करता है।हिंदी भाषा भारतीय संस्कृति और परंपराओं की वाहक है, जो हमें हमारी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ती है।हिंदी साहित्य, कविता, और गीतों ने भारतीय समाज को एक नया दृष्टिकोण और आनंद प्रदान किया है। हिंदी भाषा ने विभिन्न भारतीय भाषाओं और संस्कृतियों के बीच एकता और समझ को बढ़ावा दिया है।इस दिन को मनाने का उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और संवर्धन को प्रोत्साहित करना है।इस दिन को संविधान सभा द्वारा हिंदी को भारतीय गणराज्य की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार करने की खुशी में मनाया जाता है।

