मध्य प्रदेश सरकार किसानों के साथ छलावा कर रही है  सरकार की कथनी और करनी में अंतर है

भिंड (ब्यूरो) / सरकारी आंकड़े कहने को तो बहुत कुछ कहती हैं और सब कुछ जानने के बाद किस तरह अनजान बनती हैं मध्य प्रदेश की स्थिति तो बहुत खराब है यह बात किसान नेता संजीव बरुआ ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि भिंड जिले के कुछ आंकड़ों के साथ किसानों के साथ किस तरह है छल करती हैं और उनकी लाचारी का किस तरह फायदा उठाती हैं उसका एक नमूना रबी फसल गेहूं के आंकड़े आपके समक्ष प्रस्तुत करना चाह रहे हैं भिंड जिले में लगभग चार लाख किसान हैं हम उन किसानों की भी बात नहीं करते जिले में गेहूं के लिए 28294 किसानों ने पंजीयन कराया था आज खरीद की अंतिम तिथि है आज 4:00 बजे तक 16151 किसानों का गेहूं एमएसपी रेट पर सरकार खरीद पाए इसमें भी 2,000 से अधिक किसान ऐसे हैं जिनका पंजीयन अधिक फसल का था लेकिन उसमें से 25 या 40 या 50 परसेंट खरीद की बाकी फसल का ना ही दोबारा मैसेज आया और ना ही वह किसान फसल बेच पाए 57% किसानों से खरीद हुई उसमें से 15% किसान ऐसे हैं जो अपनी आदि-आदि से कम फसल भेज पाए 43% के साथ बिल्कुल भी फसल नहीं बेच पाए 57% किसानों से खरीदी गई फसल 106800 मेट्रिक टन भिंड जिले में मध्य प्रदेश सरकार का खरीद का लक्ष्य था 82200 मेट्रिक टन कहने को तो इन्होंने लक्ष्य से अधिक खरीद कर ली लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार भिंड जिले में 121000 हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई गई है इस रकबा में अनुमानित पैदावार 605000 मेट्रिक टन पैदा होगी 605000 मेट्रिक टन में से मात्र 106800 मेट्रिक टन खरीदी जिसका प्रतिशत मात्र 18 है सरकार जो पैदावार बता रही है उसका 18% ही गेहूं खरीद पा रही है यह आंकड़ा हमारा नहीं कृषि विभाग का है 498200 मेट्रिक टन गेहूं की फसल नहीं खरीदी एक कुंटल सरकारी खरीद और प्राइवेट मंडी में 300 से ₹400 पर कुंटल का किसान का नुकसान हो रहा है यह फसल क्यों नहीं बेच पाई कुछ उपार्जन केंद्रों ने 4 घंटे ही खरीद की कुछ दिन मौसम की वजह से बंद रखा कभी बारदाना नहीं है कभी तिलोई हुई फसल का उठाव नहीं हुआ है कुछ उपार्जन केंद्र प्रभारी कोरोना पॉजिटिव हुए कोरोना की वजह से भीड़ ना हो इस वजह से किसानों को कम कम बुलाया उपार्जन केंद्र से शुरुआत में किसानों को क्वालिटी के नाम पर परेशान किया गया खरीदी कम की जिससे किसान परेशान होकर पैसा देने को विवश हो उसकी वजह से उपार्जन प्रभारियों ने मोटी कमाई भी की 50 ऐसे प्रश्न हैं जिनकी वजह से शत प्रतिशत किसान फसल नहीं बेच पाया सरकार से आग्रह करते हैं तिथि बढ़ाकर सभी किसानों की फसल खरीदी जाए 144 धारा और कोराना काल को ढाल बनाकर हथियार के रूप में उपयोग न करें ऐसे समय पर हम लोग आंदोलन भी नहीं कर पा रहे हैं इसलिए सूचनाओं को ही प्राथमिकता दी जाए जिला प्रशासन और सरकार हम लोगों की मजबूरी को समझ कर तिथि बढ़ाई और सभी किसानों की फसल तूलवाएं

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